गोरखुवाला स्कूल में मिशन लाइफ के तहत आयोजित हुआ एक दिवसीय कार्यक्रम, वर्मी कम्पोस्टिंग और बोकाशी विधि की दी जानकारी
पांवटा साहिब। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गोरखुवाला में मिशन लाइफ (Mission LiFE) एवं ग्रीन स्कूल इनिशिएटिव के तहत एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरणीय संस्था हीलिंग पृथ्वी (Healing Prithvi) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 25 शिक्षकों को जलवायु साक्षरता एवं जैविक कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य देवानंद तोमर, उप-प्रधानाचार्य सचिन अग्रवाल तथा इको क्लब प्रभारी एवं टीजीटी मेडिकल संगीता उपस्थित रहीं।
हीलिंग पृथ्वी की संस्थापक स्मृति वर्मा ने जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसों और जैविक कचरे के बीच संबंध की जानकारी देते हुए बताया कि लैंडफिल में ऑक्सीजन की कमी के कारण जैविक कचरे से मीथेन गैस उत्पन्न हो सकती है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान देती है। उन्होंने कचरे को स्रोत पर अलग करने और उसका उचित प्रबंधन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, संस्था के 20 वर्षीय सदस्य केशव दीक्षित ने कम्पोस्टिंग की विभिन्न विधियों की व्यावहारिक जानकारी साझा की। उन्होंने विशेष रूप से जापान की बोकाशी विधि के बारे में बताया, जिसमें सूक्ष्मजीवों की मदद से जैविक कचरे का किण्वन किया जाता है। साथ ही, घरों और विद्यालयों में वर्मी कम्पोस्टिंग सहित जैविक कचरे के प्रबंधन के सरल उपाय भी समझाए।
हीलिंग पृथ्वी की अध्यक्ष नरिंदर कौर सैनी ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने हिस्से के कचरे का जिम्मेदारी से प्रबंधन करने से सामूहिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें ऐसे व्यावहारिक उपायों से जोड़ना था, जिन्हें वे अपने विद्यालयों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।



















































