पांवटा साहिब। नगर पालिका परिषद में दवा के छिड़काव के दौरान सफाई कर्मचारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौके पर दवा का छिड़काव कर रहे कर्मचारी के पास मास्क और ग्लव्स दिखाई नहीं दिए, जबकि साथ चल रहे पार्षद कुलदीप चौधरी व अन्य लोगों के मुंह पर रुमाल बंधे नजर आए।
जब आसपास मौजूद लोग भी मुंह ढककर चल रहे हैं, तो सीधे दवा का छिड़काव कर रहे कर्मचारी की सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। खास बात यह है कि पूर्व में भी छिड़काव के दौरान एक कर्मचारी की हालत गंभीर होने के बाद उसे हायर सेंटर रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई थी। वही कर्मी को ICU मैं रहना पड़ा था
अब सवाल है कि क्या दवा के छिड़काव के लिए कर्मचारियों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं? नगर पालिका प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर दवा की प्रकृति और सुरक्षा मानकों की जांच करते हुए कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाने चाहिए।
सफाई व्यवस्था जरूरी है, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है।
क्या सफाई कर्मी की जान इतनी सस्ती है?
जब दवा के छिड़काव के दौरान साथ चल रहे लोगों को भी मुंह पर रुमाल बांधना पड़ रहा है, तो बिना मास्क और ग्लव्स सीधे दवा का छिड़काव कर रहे सफाई कर्मचारी की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब पूर्व में इसी तरह के छिड़काव के दौरान एक कर्मचारी की हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर किया जा चुका है।
सवाल सीधा है—पिछली घटना के बावजूद सफाई कर्मचारी को जरूरी सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं दिए गए? क्या सफाई कर्मी की जान इतनी सस्ती है?



















































