सोलन। हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीएसपी विजय रघुवंशी से जुड़े कथित जातिगत भेदभाव, प्रताड़ना और विभागीय कार्रवाई के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। सोमवार को सोलन में डीएसपी रघुवंशी के परिजनों, रिश्तेदारों और अखिल भारतीय कोली समाज से जुड़े समर्थकों ने उपायुक्त सोलन के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान 100 से अधिक लोग उपस्थित रहे।
ज्ञापन के जरिए परिजनों और कोली समाज से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार से पूरे घटनाक्रम में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। परिवार ने आरोप लगाया कि डीएसपी रघुवंशी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और विभागीय स्तर पर उनके साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि विजय रघुवंशी ने अपनी कड़ी मेहनत, योग्यता और लंबे सेवाकाल के बल पर डीएसपी पद हासिल किया है। इसके बावजूद वर्तमान में उन्हें बिना किसी ठोस कारण के कार्यभार से मुक्त कर दिया गया है। परिवार ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई किसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि द्वेष भावना और चुनिंदा लक्ष्यीकरण से प्रेरित प्रतीत होती है।
तबादले के बाद शुरू हुआ विवाद
परिजनों के अनुसार डीएसपी विजय रघुवंशी की तैनाती पांवटा साहिब की गई थी। एसपी शिमला द्वारा कार्यमुक्त किए जाने के बाद वे विभागीय आदेशों का पालन करते हुए कार्यभार संभालने पांवटा साहिब पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें पदभार ग्रहण करने से रोक दिया गया।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने फोन और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क कर उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। इस मामले में एसपी सिरमौर, दक्षिणी रेंज के डीआईजी और सीआईडी स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी परिजनों ने सवाल खड़े किए हैं। बाद में विजय रघुवंशी के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच की सिफारिश कर दी गई।
सरकारी वाहन वापस लेने और वेतन कटौती पर सवाल
मामले में परिजनों ने आरोप लगाया कि डीएसपी विजय रघुवंशी का सरकारी वाहन जबरन वापस ले लिया गया, जिसके कारण उन्हें करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर कार्यालय जाना पड़ा। परिवार के अनुसार, वाहन सुविधा के नाम पर उनके वेतन से हर महीने 750 रुपये की कटौती की जाती थी, जो वाहन छीन लिए जाने के बाद भी जारी रही।
इसके अतिरिक्त परिजनों का यह भी दावा है कि इस विवाद का असर परिवार पर भी डाला गया और उनकी पत्नी, जो उस समय छोटा शिमला थाने में बतौर एसएचओ तैनात थीं, पर भी अनुचित दबाव बनाया गया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत
डीएसपी विजय रघुवंशी ने इस पूरे घटनाक्रम को संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाया है। आयोग अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह कार्रवाई नियमित प्रशासनिक निर्णय थी या फिर इसके पीछे जातिगत भेदभाव का कोई पैटर्न काम कर रहा था।
परिवार ने मांग की है कि तबादला आदेश, कार्यमुक्ति व जॉइनिंग रिकॉर्ड, विभागीय पत्राचार, एसपी सिरमौर की रिपोर्ट, वाहन आवंटन और वेतन कटौती से जुड़े डेली डायरी के सभी सरकारी दस्तावेजों की गहनता से पारदर्शी जांच की जानी चाहिए।
कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान परिजनों और कोली समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि डीएसपी रघुवंशी के खिलाफ मानसिक उत्पीड़न और भेदभाव की प्रक्रिया बंद नहीं हुई तथा निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो कोली समाज पूरे राज्य स्तर पर आंदोलन शुरू करेगा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को समानता और सम्मान से जीने का अधिकार देता है। परिजनों ने यह भी साफ किया कि उनका मकसद किसी अधिकारी को पहले से दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि सच्चाई को सामने लाना है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया थी या उत्पीड़न। इस दौरान
दीप राम रघुवंशी, हरि कृष्ण रघुवंशी, केशव रघुवंशी, धर्म पाल रघुवंशी, मस्त राम रघुवंशी, तारा दत्त रघुवंशी, तुला राम रघुवंशी, अमित रघुवंशी, संदीप रघुवंशी, योगेश रघुवंशी, विशाल रघुवंशी, सुरेंद्र रघुवंशी, अमर रघुवंशी, दीपक रघुवंशी, नंद लाल रघुवंशी, सोहन लाल रघुवंशी, बिमल रघुवंशी, कंचन रघुवंशी, सुमित्रा रघुवंशी, आशा रघुवंशी, मीना रघुवंशी, उषा रघुवंशी, बबीता रघुवंशी, उषा रघुवंशी, संतोष रघुवंशी, सीमा रघुवंशी, लीला दत्त रघुवंशी, किरण रघुवंशी, सुनीता रघुवंशी, सोनू रघुवंशी, रेनू रघुवंशी, शीला रघुवंशी, दिनेश रघुवंशी, सुनील रघुवंशी, संदीपक तोमर, नीरज कश्यप, विनय कश्यप, सोहन लाल, ओम प्रकाश, अमरनाथ कश्यप, सुंदर लाल, नरेंद्र कश्यप, नरेश, चमन, ललित, गरीब दास, शुभम कश्यप, हेम चंद कश्यप, विनोद कश्यप, मुरारी लाल, रतन राठौर, राम किशन, ध्यान सिंह, किशोरी लाल, सतीश कुमार, मोहन लाल, मोहन सिंह सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे


















































