हिमाचल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी ने फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सिरमौर जिले का पहला संस्थान बनने का गौरव प्राप्त किया

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पांवटा साहिब में फार्मेसी शिक्षा को बड़ी उपलब्धि — सिरमौर जिले का पहला संस्थान बना हिमाचल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, जिसे डॉक्टर ऑफ फार्मेसी पाठ्यक्रम की स्वीकृति

पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश):
हिमाचल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी ने फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सिरमौर जिले का पहला संस्थान बनने का गौरव प्राप्त किया है, जिसे डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (Pharm.D.) पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की स्वीकृति मिली है। यह स्वीकृति फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रदान की गई है, जिसमें 30 सीटों का वार्षिक प्रवेश अनुमोदित किया गया है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए बल्कि पूरे सिरमौर जिले के लिए एक उपलब्धि मानी जा रही है। इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को अब उच्च स्तरीय क्लिनिकल फार्मेसी शिक्षा अपने ही जिले में प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। डॉक्टर ऑफ फार्मेसी एक पेशेवर डिग्री कोर्स है, जो क्लिनिकल फार्मेसी, रोगी देखभाल, दवा प्रबंधन एवं अस्पताल आधारित प्रशिक्षण पर विशेष रूप से केंद्रित होता है।संस्थान निदेशक डॉ. प्रीति गुप्ता, चेयरमैन ई. यथार्थ गुप्ता, वाइस चेयरमैन डॉ. पार्थ गुप्ता, तथा प्राचार्य डॉ. रमनदीप सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान की गुणवत्ता, समर्पण और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के आरंभ से विद्यार्थियों को क्लिनिकल सेटअप एवं अस्पतालों में कार्य करने के व्यापक अवसर प्राप्त होंगे, जिससे वे स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
प्रबंधन ने आगे कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा के विकास को नई दिशा प्रदान करेगी तथा संस्थान भविष्य में भी उत्कृष्ट शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
यह उपलब्धि क्षेत्र में शैक्षणिक उन्नति के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।