पांवटा साहिब की राजनीति में इस बार एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। जो नेता कभी खुद को MLA पद का मजबूत उम्मीदवार बताया करते थे, बड़ी-बड़ी राजनीतिक सभाओं में विधानसभा चुनाव लड़ने की बात करते थे और समर्थकों के बीच खुद को भविष्य का विधायक मानते थे, आज वही नेता पार्षद बनकर सिमट गए हैं।
नगर परिषद चुनाव के नतीजों के बाद कई नेताओं और उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। जीत के बाद जगह-जगह स्वागत समारोह, फूल-मालाएं, मिठाइयां और जुलूस निकाले जा रहे हैं। माहौल ऐसा नजर आ रहा है मानो किसी ने विधानसभा चुनाव जीत लिया हो।
लेकिन शहर में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि जो चेहरे कभी विधानसभा की राजनीति में बड़े दावेदार माने जाते थे, आज वे वार्ड स्तर की राजनीति तक सीमित होकर रह गए हैं। राजनीति के जानकार इसे बदलते समय और जनता के मूड का संकेत मान रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीति में जमीन से जुड़ाव और जनता का विश्वास सबसे बड़ी ताकत होती है। कई नेता बड़े सपने लेकर मैदान में उतरे थे, लेकिन हालात ऐसे बदले कि उन्हें पार्षद की राजनीति में ही अपनी जगह बनानी पड़ी।
हालांकि समर्थकों का उत्साह अब भी कम नहीं है। जीत के बाद कई नेता खुद को बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में पेश करने में जुट गए हैं और समर्थकों के बीच MLA जैसी फीलिंग लेते नजर आ रहे हैं।
पांवटा साहिब में इन चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि राजनीति में समय के साथ पद, पहचान और परिस्थितियां तेजी से बदलती रहती हैं। कल जो नेता विधानसभा की दावेदारी कर रहे थे, आज वही पार्षद बनकर अपनी जीत का जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं।

















































