संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649वें पावन प्रकटोत्सव पर पांवटा साहिब में ऐतिहासिक नगर कीर्तन, श्रद्धा और सेवा से गूंजा शहर

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पांवटा साहिब। अमित कुमार

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649वें पावन प्रकटोत्सव के शुभ अवसर पर पांवटा साहिब के देवीनगर स्थित संत रविदास मंदिर से भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक नगर कीर्तन निकाला गया। नगर कीर्तन के निकलते ही पूरा शहर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के रंग में रंग गया और चारों ओर “जय गुरु रविदास” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।


नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और गुरु वाणी के मधुर स्वर ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
नगर कीर्तन के माध्यम से संत रविदास जी के महान विचारों—समता, समानता, भाईचारा, मानवता और सामाजिक समरसता—का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु रविदास जी के बताए मार्ग पर चलने और समाज से भेदभाव, छुआछूत व असमानता को समाप्त करने का संकल्प लिया।
नगर कीर्तन के दौरान शहर में जगह-जगह जलपान, छबील और लंगर की व्यवस्था की गई। सेवा भाव से की गई इन व्यवस्थाओं ने गुरु की शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। राहगीरों और श्रद्धालुओं ने अनुशासन एवं प्रेम के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
नगर कीर्तन पांवटा साहिब के मुख्य बाजार से होते हुए बद्रीपुर चौक तक पहुंचा, जहाँ श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात नगर कीर्तन पुनः वार्ड नंबर-10 स्थित संत रविदास मंदिर में वापस लौटा।
कार्यक्रम का समापन संत रविदास मंदिर परिसर में विधि-विधान, अरदास एवं शांति पाठ के साथ श्रद्धापूर्वक किया गया। समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन आज भी समाज को समानता, एकता और भाईचारे की दिशा में प्रेरित करता है।
यह भव्य नगर कीर्तन पांवटा साहिब के इतिहास में आस्था, सेवा और सामाजिक चेतना का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर हमेशा याद किया जाएगा।