पांवटा साहिब में आयोजित होली मेले की सांस्कृतिक संध्या के दौरान प्लास्टिक उपयोग से जुड़े नियमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यक्रम स्थल पर 500 मिलीलीटर से कम क्षमता वाली पानी की बोतलों का इस्तेमाल खुलेआम देखा गया, जबकि सरकार और प्रशासन द्वारा ऐसे प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकारी कार्यक्रमों में ही नियमों की अनदेखी होगी तो आम जनता से नियमों का पालन कैसे करवाया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सवाल उठाया कि अगर अधिकारी और आयोजक ही प्रतिबंधित वस्तुओं का इस्तेमाल करेंगे, तो फिर आम आदमी पर कार्रवाई करना कितना उचित है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन को पहले खुद नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि समाज में सही संदेश जाए और पर्यावरण संरक्षण के प्रयास प्रभावी बन सकें।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और भविष्य में ऐसे आयोजनों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश में 500 ML से कम (या 500 ML तक) की प्लास्टिक पानी की बोतलों को लेकर सरकार ने खास नियम लागू किए हैं।
क्या कानून है
• हिमाचल सरकार ने 1 जून 2025 से 500 ML तक की PET प्लास्टिक पानी की बोतलों पर रोक लगाई है। 
• यह निर्णय Himachal Pradesh Non‑Biodegradable Garbage (Control) Act, 1995 की धारा के तहत लिया गया है। 
• यह प्रतिबंध खासकर इन जगहों पर लागू है:
• सरकारी कार्यक्रम
• सरकारी मीटिंग, सम्मेलन और आयोजन
• होटल, HPTDC होटल
• सार्वजनिक कार्यक्रम और समारोह
जुर्माना
• नियम तोड़ने पर ₹500 से ₹25,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। 
सरकार का उद्देश्य
• छोटी प्लास्टिक बोतलें ज्यादा कचरा पैदा करती हैं
• इनका रीसायकल करना कठिन होता है
• पर्यावरण में प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ता है 
✅ इसलिए सरकार ने सुझाव दिया है कि इनकी जगह:
• कांच की बोतल
• स्टील कंटेनर
• वॉटर डिस्पेंसर का इस्तेमाल किया जाए। 
✔️ इसलिए अगर किसी सरकारी कार्यक्रम (जैसे होली मेला सांस्कृतिक संध्या) में 500 ML से कम पानी की बोतलें इस्तेमाल हुई हैं, तो यह नियमों के खिलाफ माना जा सकता है।

















































