सरकार के पास आज भी SC और OBC वर्गों के सटीक आँकड़े मौजूद नहीं
सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। बड़े दुख की बात यह है कि सरकार के पास आज भी SC और OBC वर्गों के सटीक आँकड़े मौजूद नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब आँकड़े ही उपलब्ध नहीं होंगे तो इन वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकार और आरक्षण का लाभ किस आधार पर मिल पाएगा? पिछले तीन वर्षों से लगातार सरकार के पास स्पष्ट डेटा न होने का सीधा असर न केवल आरक्षण व्यवस्था पर पड़ा है, बल्कि इससे जुड़ी कई कल्याणकारी योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार जातिगत जनगणना (Caste Census) से बच रही है, जबकि यह सामाजिक न्याय की दिशा में सबसे अहम कदम हो सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि इस तरह का सर्वे बेहद जटिल और संसाधन-खर्चीला काम है।
लेकिन, मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
बिना सटीक आंकड़ों के आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आखिरकार कितनी पारदर्शिता के साथ पात्र लोगों तक पहुँच पाएगा?