संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी के 649वें प्रकटोत्सव पर देवीनगर में उमड़ा श्रद्धा और भाईचारे का सैलाब

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पांवटा साहिब।
“ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न,
छोट-बड़ो सब सम बसें, रविदास रहे प्रसन्न।”
संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी के 649वें पावन प्रकटोत्सव के शुभ अवसर पर पांवटा साहिब के देवीनगर स्थित संत रविदास मंदिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने गुरु रविदास जी के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति, सद्भाव और समानता का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों से आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
इस पावन अवसर पर सामाजिक समरसता और भाईचारे की एक अनुपम मिसाल भी देखने को मिली। कार्यक्रम में उपस्थित राजा ने भावुक शब्दों में कहा कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में बसती है और यही इस देश की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहार प्रेम और सम्मान के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी का आशीर्वाद लेकर उनका हृदय आनंद और शांति से भर गया है।
राजा ने कहा, “मैं मुस्लिम समाज में जन्मा जरूर हूं, लेकिन मेरा विश्वास मानवता में है। मैं सभी धर्मों को मानता हूं और सभी धर्मों का दिल से सम्मान करता हूं।” उनके इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन को छू लिया और कार्यक्रम को आपसी सौहार्द का मजबूत संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में गुरु रविदास जी के आदर्शों को आत्मसात करने, भेदभाव और अन्याय से मुक्त समाज के निर्माण तथा समानता व भाईचारे के मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया गया।