पांवटा साहिब/माजरा: एक ओर सरकार खेलों को बढ़ावा देने और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर माजरा में संचालित राज्य स्तरीय कन्या हॉकी छात्रावास की स्थिति इन दावों की हकीकत बयां कर रही है।
करीब 32 खिलाड़ियों के रहने वाले इस छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। हॉस्टल की इमारत जर्जर हालत में है—दीवारों में दरारें, टूटे बेड, जर्जर दरवाजे, खराब शौचालय, पानी की समुचित व्यवस्था नहीं और साफ-सफाई की कमी। रसोई की हालत भी दयनीय बताई जा रही है, जहां भोजन बनाने की जिम्मेदारी केवल एक बुजुर्ग व्यक्ति पर है।
यह वही छात्रावास है जहां से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल चुके हैं और प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं। बावजूद इसके, आज यहां रह रहीं बेटियां खंडहर जैसे भवन में रहने को मजबूर हैं।
डाइट मनी वर्षों से लंबित
सूत्रों के अनुसार खिलाड़ियों को पिछले लगभग एक वर्ष से डाइट मनी का भुगतान नियमित रूप से नहीं मिला है। पोषण की कमी सीधे तौर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर डाल रही है। अभिभावकों में भी इसको लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि बेटियां मैदान में पसीना बहा रही हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनका भविष्य दांव पर लग रहा है।
मंत्रियों के दौरे, पर सुधार नहीं
कई मंत्री और अधिकारी छात्रावास का दौरा कर चुके हैं, लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया। इससे सरकार और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
7 करोड़ का टर्फ मैदान भी उपेक्षा का शिकार
माजरा में लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से हॉकी टर्फ मैदान तैयार किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि करीब दो साल बाद भी मैदान के लिए बिजली का ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं हो पाया है। बिजली की उचित व्यवस्था न होने के कारण पानी ना गिरने से टर्फ की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते रखरखाव नहीं किया गया तो खिलाड़ियों को घुटनों और जोड़ों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
तिरुपति ग्रुप का आश्वासन
तिरुपति ग्रुप के निदेशक अशोक गोयल ने छात्रावास की मरम्मत और आवश्यक सुधार करवाने का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह आश्वासन कब तक जमीन पर उतरता है।
बढ़ते आक्रोश के संकेत
स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि हॉस्टल की तत्काल मरम्मत करवाई जाए, लंबित डाइट भत्ता जारी किया जाए और खिलाड़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि छात्रावास और मैदान की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि प्रदेश की बेटियां बेहतर सुविधाओं के साथ खेल में आगे बढ़ सकें और देश-प्रदेश का नाम रोशन करती रहें।














































