पांवटा साहिब: पांवटा साहिब और पुरुवाला के क्षेत्रीय तिब्बती महिला संघ द्वारा 12 मार्च 2026 को तिब्बती महिला विद्रोह दिवस की 67वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक शांतिपूर्ण विरोध रैली निकाली गई। रैली सुबह करीब 10 बजे भूपपुर (एनएच-72) रोड से शुरू होकर बद्रीपुर, वाई-पॉइंट और मुख्य बाजार से होते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुंची।
रैली में बड़ी संख्या में तिब्बती महिलाएं और स्थानीय तिब्बती समुदाय के लोग शामिल हुए। उन्होंने तिब्बती महिलाओं के अधिकारों और तिब्बत की आज़ादी से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।
तिब्बती महिला विद्रोह दिवस हर वर्ष 12 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन 1959 में ल्हासा में चीनी शासन के खिलाफ तिब्बती महिलाओं द्वारा किए गए ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन की याद में मनाया जाता है। उस समय हजारों तिब्बती महिलाएं पोटाला पैलेस के सामने एकत्रित हुईं और ल्हासा की सड़कों पर मार्च किया था।
बताया जाता है कि उस आंदोलन के दौरान कई महिलाओं को गिरफ्तार किया गया और कठोर दमन का सामना करना पड़ा। बाद में चीनी सेना ने विद्रोह को दबा दिया, जिसमें हजारों तिब्बतियों की मौत हो गई। उसी दौर में तिब्बत के आध्यात्मिक नेता Tenzin Gyatso (14वें दलाई लामा) को तिब्बत छोड़कर भारत आना पड़ा।
इस अवसर पर तिब्बती महिला संघ के पदाधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बत के मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की।
रैली का नेतृत्व क्षेत्रीय तिब्बती महिला संघ पांवटा साहिब की अध्यक्ष दावा डोलमा और क्षेत्रीय तिब्बती महिला संघ पुरुवाला की अध्यक्ष टाशी वांगमो ने किया। उन्होंने कहा कि तिब्बती महिलाएं अपने अधिकारों और तिब्बत की पहचान को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
















































