शिमला-मटौर उच्च मार्ग पर बुधवार को मंगरोट के एक व्यक्ति ने अपना टीन का खोखा सडक़ पर गाड़ दिया है। बताया जा रहा है कि बिलासपुर प्रशासन ने उस व्यक्ति की रोजी रोटी का एक मात्र जरिया उसका खोखा सरकारी जमीन से हटा दिया था। जिससे नाराज व्यक्ति ने लोक निर्माण विभाग द्वारा अवैध रूप से हड़पी उसकी जमीन पर अपना खोखा लगा दिया है। इस जमीन बिना मुआवजा दिए या अपने नाम ट्रांसफर करवाए लोक निर्माण विभाग सालों से कब्जा किए बैठा है और यहां से हर रोज हजारों गाडियां आती जाती है।

व्यक्ति का कहना है कि प्रशासन सरकारी जमीन पर लगाए खोखों, रेहड़ी और ठेले आदि तो हटा रहा है लेकिन लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क बना कर हड़पी आम आदमियों की जमीन उनको नही दिला रही। सरकार और प्रशासन आम लोगों के साथ न्याय नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि जहां सड़क पर उन्होंने अपना खोखा रखा है, वह जमीन उनकी माता के नाम है और लोक निर्माण विभाग बहुत लंबे समय से इस पर सड़क निकाल कर अवैध रूप से कब्जा किए बैठा है।
व्यक्ति का कहना है कि अगर सरकार मेरा खोखा सरकारी जमीन से हटाती है तो मेरी जमीन से भी सड़क को हटाए। उन्होंने कहा कि यहां सड़क में मेरी 3 से 5 बिस्वा जमीन आती है और हाई कोर्ट से मांग की है कि जैसे सरकारी जमीन से कब्जे हटाए जा रहे है, वैसे ही मेरी जमीन से भी लोक निर्माण विभाग का कब्जा हटा कर न्याय दिलाया जाए।

आपको बता दें कि यह हिमाचल में यह पहला मामला नहीं है। लोक निर्माण विभाग ने पूरे हिमाचल में कई जगह आम जनता की जमीनों पर कब्जा कर रखा है। जिन पर कई सालों से कभी कोई सुनवाई नहीं हुई है। हाई कोर्ट ने भले ही सरकार को अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया है। लेकिन सरकारी विभागों द्वारा किए कब्जे कब हटेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। क्योंकि विभागों के कब्जों से हिमाचल की गरीब जनता का सालों से शोषण हो रहा है।

अब देखना यह होगा कि इस मामले के बाद सरकारी विभागों द्वारा अवैध तरीके से कब्जे में ली गई जमीनों पर हाई कोर्ट या सरकार क्या फैसला देते है। क्या हिमाचल के गरीबों को इंसाफ मिलेगा या यूं ही हिमाचल में गरीबों का शोषण होता रहेगा।

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